ग़मो की दुनिया
गमों की दुनिया से निकल कर जो कुछ पल तेरे संग जो जिया बस वही जिया हूं मैं।
ना कुछ वास्ता था मेरा खुशियों से जो कुछ पल हंसा हूं तेरे संग, बस वही हंसा हूं मैं।
अब तू रुखसत हो गई है मुझसे तो फिर अब उसी अंधेरे में चला गया हूं मैं ।
कशमकश बनी है कुछ यूं ही जिंदगी अपनी समझ नहीं आता जी रहा हूं या मर गया हूं मैं।
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