तकल्लुफ

 

               तकल्लुफ ना कीजिए उन्हें भुलाने की  , 

      रहने भी दीजिए दिल में कुछ यादें उनके फसाने की । 

     आहिस्ता आहिस्ता सुलगती रहेगी जिंदगी यादों में उनकी 

 ज़रूरत ही क्या है मिटा कर यादों को इक ही दिन मर जाने की ।

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