बहुत है .......
मुझे महफ़िल की ख्वाहिश
नही , तेरी बाहों का
आशियाना ही बहुत है।।
मुझे शिकायत नही उस
खुदा से ,तेरा दूर से
मुस्कुराना ही बहुत है।।
कहना है बस एक बार तुझसे
इनकार ही सही, बस एक बार तेरा
हबीब बन जाना ही बहुत है।।
फिर बाद छोड़ दे दामन क्यो
न तू मेरा, बस एक बार तेरा
मेरी बाहों में आना ही बहुत है।।
नही , तेरी बाहों का
आशियाना ही बहुत है।।
मुझे शिकायत नही उस
खुदा से ,तेरा दूर से
मुस्कुराना ही बहुत है।।
कहना है बस एक बार तुझसे
इनकार ही सही, बस एक बार तेरा
हबीब बन जाना ही बहुत है।।
फिर बाद छोड़ दे दामन क्यो
न तू मेरा, बस एक बार तेरा
मेरी बाहों में आना ही बहुत है।।
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