मज़बूरियां --/--
कुछ मजबूरियां है जिंदगी में,
वरना हर पल हम साथ होते ।
न होते जुदा तुमसे एक पल के लिए भी,
जो तेरे पास होने की आस होती ।
इंतज़ार करता मैं जिंदगी भर तेरा,
बस मुझे तेरे तलबगार की ज़रूरत होती।
वरना हर पल हम साथ होते ।
न होते जुदा तुमसे एक पल के लिए भी,
जो तेरे पास होने की आस होती ।
इंतज़ार करता मैं जिंदगी भर तेरा,
बस मुझे तेरे तलबगार की ज़रूरत होती।
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