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दिल्लगी से भी कभी -कभी मोहब्बत हो जाती है।।।।।

न जी पा रहा हूँ मै ।। न मर पा रहा हूँ मैं।            अपनी बेबाक़ मोहब्बत            न उसे बता पा रहा हूँ मैं।          इस दिल पर उसकी यादो के             जुगनुयो से जी रहा हूँ मैं।  आज उसे भुलाने की कोशिश कर रहा हूँ मैं। मगर उनकी यादों का करवां नाकाम कर जाती है। दिल्लगी से भी कभी कभी मोहब्बत हो जाती है।          दूर रहना पड़ता है किसी से ,         किसी की खुशियों की खातिर ।  चाह कर भी नही बयां कर पाते उल्फ़तो को अपनी ।          चुप रहते है लब ,मगर हसरतें           सब कुछ बयां कर जाती है। सिलसिले मोहब्बत में गलतियां हो ही जाती है। दिल्लगी से भी कभी कभी मोहब्बत हो जाती है।।।।